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  • न्यायिक मानवाधिकार परिषद
    Jul 16, 2025

    न्यायिक मानवाधिकार परिषद द्वारा माह के आखिरी रविवार को प्रत्येक कार्यालय में जन समस्या निवारण दिवस होता है जिसमें लोगों की जन समस्या को सुन कर संबंधित विभाग को कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जाता है


  • "एक बार नहीं सौ बार नहीं हर बार न्याय कराएंगे
    जहां हुआ अन्याय न्याय दरबार वही लगाएंगे"

    प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए..

    न्यायिक मानवाधिकार परिषद महिला प्रकोष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री रागिनी गांधी जी द्वारा अनिरुद्ध आचार्य जी को राखी बांध रक्षाबंधन मनाया।

    कथावाचक श्री अनिरुद्ध आचार्य जी के साथ न्यायिक मानवाधिकार परिषद महिला प्रकोष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन सुश्री रागिनी गांधी जी द्वारा रक्षाबंधन पर्व मनाया गया।

    न्यायिक मानवाधिकार परिषद द्वारा स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ने वाली सामग्री वितरण किया।

    महाराष्ट्र कमेटी द्वारा पुलिस आयुक्त का स्वागत कर न्यायिक मानवाधिकार परिषद के उद्देश्यों से उन्हें अवगत कराया।

    न्यायिक मानवाधिकार परिषद प्रयागराज कमेटी द्वारा बाढ़ पीड़ितों को भोजन संबंधित उचित मदद दी गई

    न्यायिक मानवाधिकार परिषद महाराष्ट्र राज्य कार्यकारिणी अध्यक्ष अश्वनी भालेराव जी जन समस्या को लेकर जनसुनवाई करते हुई।

    न्यायिक मानवाधिकार परिषद तिरंगा यात्रा

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    संगठन के विचार:- न्यायिक मानवाधिकार परिषद एक सामाजिक संगठन है, जिसका पंजीकरण भारतीय न्यास अधिनियम 1882 के अन्तर्गत पंजीकृत किया गया है। जिसका पंजीकरण नंबर 119/2020 है और इसे नीति आयोग भारत सरकार के एनजीओ दर्पण से मान्यता प्राप्त है जिसका पंजीयन नंबर UP/2021/0279691 है और संगठन को सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार से भी मान्यता प्राप्त है जिसका पंजीयन नंबर UP/00033885 है यह एक ग़ैर-सरकारी, ग़ैर-राजनैजिक राष्ट्रीय संगठन है।
    हमारा कार्य समाज के लोगों को जागरूक करना औऱ आम जनता के अधिकारों के हो रहे हनन के खिलाफ़ आवाज़ उठाना औऱ समाज फैले भ्रष्टाचार को उजागार करते हुए शासन प्रशासन को अवगत करना मुख्य उद्देश्य है। क्योंकि आज हमारे भारतवर्ष ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व में मानव अधिकार हनन की घटनाएं निरन्तर बढ़ती जा रही हैं, जिसमें मानव उत्पीड़न, महिला उत्पीड़न, यौन शोषण एवं बाल श्रम जैसी घटनाऐं प्रमुख हैं। जेल में बन्द कैदियों की स्थित दयनीय एवं चिन्ताजनक है। देश में भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता, जातिवाद, धर्मवाद, भाषावाद जैसी समस्याऐं दिन पर दिन विकराल रूप धारण करती जा रही हैं।आज़ादी के 66 वर्ष बीत जाने के बाद आज भी अधिकांश भारतवासी बेहतर शिक्षा, भोजन, स्वास्थ, आवास, शुद्ध पेयजल, न्याय, समानता और विकास जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
    हमारे संविधान में जाति, धर्म, वंश मूल, लिंग, अमीरी, गरीबी, शिक्षित-अशिक्षित किसी भी प्रकार का विभेद नहीं किया गया है। संविधान में देश के प्रत्येक व्यक्ति को दैहिक एवं प्रकृतिक स्वतन्त्रता के अधिकार के साथ ही साथ गरिमामय जीवन यापन करने की भावना निहित की गयी है। इसको व्यवहारिक रूप से लाने के लिए संविधान में विधायिका, न्यायपालिका एवं कार्यपालिका की व्यवस्था की गयी है। इसी आधार पर हमारे देश का संविधान विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान माना जाता है।परन्तु विडम्बना यह है कि इसका लाभ आम आदमी को नहीं मिल पा रहा है।
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय मिल सका है? गाँव, मोहल्लों में सफाई नहीं होती, राशन की दुकान में सामान सही से नहीं मिलता, सरकारी दफ्तरों में बिना सुविधा शुल्क के काम नहीं होता, अस्पतालों में दवाईयां नहीं मिलतीं, डाक्टर,नर्स मरीजों पर ध्यान नहीं देते, सड़कें टूटी फूटी हैं, ग्राम-स्तर के अधिकारी से लेकर राजनेता सांसद,विधायक, मंत्री तक ध्यान नहीं देते, गाँवों एवं पिछड़े इलाकों में बिजली ठीक से नहीं मिलती। इन सब समस्याओं के निराकरण के लिए हमारा संगठन प्रयासरत है तथा इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु संगठन का गठन किया गया।हमारा कार्य लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। हम किसी भी सरकारी योजनाओं का संचालन नहीं करते हैं लेकिन सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने कार्यो में सहयोग प्रदान करते हैं। जिससे कोई भी व्यक्ति अपने अधिकारों से वंचित न रह जाए ये संगठन की कोशिश रहती है।
    न्यायिक मानवाधिकार परिषद संगठन अपने सदस्यों के सहयोग से अपनी गतिविधियां संचालित करता है। अगर आप भी इन गतिविधियों का हिस्सा बनना चाहते हैं तो आपका स्वागत है आप भी इस शुभ कार्य में सहयोग प्रदान कर सकते हैं। जिसके लिए दान/सहयोग करने वाले व्यक्ति को संगठन की तरफ से रसीद उपलब्ध कराई जायेगी लेकिन रसीद प्राप्त करते समय राष्ट्रीय कार्यालय से संपर्क जरूर किया जाए जिससे सहयोग करने वाला शख्स ठगी का शिकार न हो सके जालसाजों से सावधान रहना बहुत जरूरी है, और अगर आप अपना कार्य किसी व्यक्ति के माध्यम से हमारे कार्यालय भेज रहे हैं तो इस बात का ध्यान रहे कि वह व्यक्ति आपका विश्वस्त हो। किसी भी तरह की जानकारी के लिए संगठन के पदाधिकारियों से सम्पर्क करें जो आपकी निःस्वार्थ भाव से आपकी पूरी मदद करेंगे।
    जिससे आपकी आवाज को हम अपने संगठन के माध्यम से शासन प्रशासन से लेकर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुचा सके मानव सेवा ही संगठन का मुख्य उद्देश्य है।
    जय हिंद जय भारत
    अधिवक्ता शोभित कश्यप
    संस्थापक/राष्ट्रीय अध्यक्ष

    President Message

    न्यायिक मानवाधिकार परिषद संघ के लिए संदेश:
    न्यायिक मानवाधिकार परिषद संघ, एक ऐसी संस्था है जो समाज में हर व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक सुरक्षा के लिए निरंतर कार्यरत है। इस संघ का उद्देश्य न केवल लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है, बल्कि उनके अधिकारों की उल्लंघना के खिलाफ संघर्ष करना भी है। संघ के प्रयासों से समाज के हर वर्ग, विशेष रूप से कमजोर और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा संभव हो रही है। आप सभी का समर्पण और दृढ़ संकल्प न केवल हमारे समाज में बदलाव ला रहा है, बल्कि यह देश के संविधान और मानवाधिकारों के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी बल दे रहा है। हमारे समाज में समानता, न्याय और स्वतंत्रता का आदर्श केवल तभी संभव है जब हम सभी मिलकर अपने अधिकारों की रक्षा करें। न्यायिक मानवाधिकार परिषद संघ की टीम के सभी सदस्य, आप सभी का कार्य सराहनीय और प्रेरणास्त्रोत है। हम आपके साथ मिलकर समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए संकल्पित हैं। मानवाधिकारों की रक्षा और संविधान की सुरक्षा के प्रति आपकी प्रतिबद्धता न केवल हमारे देश, बल्कि पूरे समाज के लिए एक उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। आपका कार्य प्रेरणा का स्रोत है, और हम आपके प्रयासों का समर्थन करते हुए एक समान, न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।
    धन्यवाद।

    श्री शोभित कश्यप (अनुराग कश्यप चेयरमैन/राष्ट्रीय अध्यक्ष भावी विधायक ) न्यायिक मानवाधिकार परिषद।
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